Saturday, 20 March 2010

बस्स थोडा इंतज़ार और सही .. !!

जुटा रहां था टुकड़ो को .. 
तेरे आने से , उनका बिखरना और सही ..
बस्स थोडा इंतज़ार और सही .. !!

रोक रखा था आंसुओ को ...
               आने से तेरे, वो मोती बेहेना और सही
           बस्स थोडा इंतज़ार और सही ... !!

भुला दिया था इन जख्मो को ...
आके तेरा उनको सेहेलाना और सही
बस्स थोडा इंतज़ार और सही .... !!


सुर्ख सी थी हमारी आँखे ..
                        तेरे आने से, उनका धुंदलाना .. और सही ..
          बस्स थोडा इंतज़ार और सही .. !!
 रुक सी गई थी धड़कने ..
  तेरे आने से, दिल धड़कना .. और सही ..
 बस्स थोडा इंतज़ार और सही ... !!

लगा रखा था दिल तुझसे ...
      पर तू गैर का होना .. और सही ...
  बस थोडा इंतज़ार और सही !!

 कर चले अलविदा सभी को ..
 अब अपना ठिकाना .. "और" सही ..
  तेरा जाना और सही ..
  अब इंतज़ार और नहीं ..
  अब इंतज़ार ...... !!

                              केदार २० मार्च २०१

1 comment:

Janpune said...

लगा रखा था दिल तुझसे ...
पर तू गैर का होना .. और सही ...
बस थोडा इंतज़ार और सही !!

asa kasa ? kalala nahi ..