Saturday, 31 October 2009

तुम .....

बिखरी सी इन जुल्फो मे चांद सी नजर आती हो तुम!
दिल के हो पास , पर फिर भी क्यों दूर नजर आती हो तुम !!
             
नशीली सी इन आँखो से , लाखों को दिवाना बनाती हो तुम |
इक नजर के कायल है बस , फिर भी नज़र क्यों नही आती हो तुम ||

रिश्ता है कोई तुम्हारा इस दिले से, हर धड़कन मे बस जाती हो तुम |
जिंदगी बन गयी हो हमारी , फिर भी क्यों हमसे शरमाती हो तुम  ||

कुछ यही हाल है तुम्हारे भी दिल का , क्यों नही बतलाती हो तुम |
कह भी दो जो हो छुपाए दिल मे , के हमे ही दिल मे बसाती हो तुम !!

                                                                 केदार - २९/१०/२००९

2 comments:

suraj-ghemad said...

are premat padlas kay re kunachya itkya Chan kavita kartos tu?

Aruna Cheruvu said...

As Always... An Awesome Creation. Has touched my heart! Also, I am glad that I was a part of it's refinement :)